ख़ुशबू बाँटो

हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-'हाइकु कविताओं की वेब पत्रिका'-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है !

डॉ सुधेशडा.सुधेश

1

प्यार अब है

सजी बैठक बीच

काग़ज़ी फूल ।

2

अध्यापक है

एक घिसा रिकार्ड,

जो अनसुना ।

3

कली खिली क्या !

भँवरे रसलोभी

पगलाए हैं ।

4

सुख के साथी

प़कट शत्रु पर

न्यौछावर हैं ।

5

चिकने मुखड़े

पल भर के सुख

जी के दुखड़े ।

6

आँख बाज़ की

झपट चील की तो,

कौन बचेगा?

7

जितने ऊँचे,

उतने ही वीराने

खड़े ताड़ ये ।

8

कैसा युग है !

गधे निकल भागे,

घोड़ों से आगे ।

9

कैसे बादल

चोटी पर बरसे

मरु हैं प्यासे ।

10

नई कोंपलें

शीश उठा कहतीं-

‘नित्य खिलना।’

11

खिले सुमन

झर -झर कहते-

‘ख़ुशबू बाँटो।’  

12

सूखा पत्ता भी

कुचले जाने पर,

शोर मचाता ।

13

नव कलियाँ

झर झर कहती

कौन अमर ।

14

 नभ के तारे

रूप देखती मानो

मेरी दो आँखें ।

-0-

View original post 274 और  शब्द

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Published by

drsudhesh

मैं मूलत: कवि हूँ , पर गद्य की अनेक विधाओं में लिखता हूँ , जैसे आलोचना , संस्मरण , यात्रा वृत्तान्त , व्यंग्य , आत्मकथा , ललित निबन्ध । मेरी अब तक २८ पुस्तकें छप चुकी हैं । मैं ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में २३ वर्षों तक अध्यापन किया । उस के पहले उत्तर प़देश के तीन कॉलेजों में आठ वर्षों तक अध्यापन किया था । मैं तीन बार विदेश यात्रा कर चुका हूँ ।

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